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पहली रेंजर साईकल से आपका परिचय तो हो चुका होगा, आईये अब आपका परिचय अपनी दूसरी साईकल से करवाता हूँ, यह रेसिंग साईकल है और रेंजर से काफी हल्की भी है:

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विश्व प्रसिद्ध सुन्दरी यानि मेरी रेसिंग साईकल।

आज ही के दिन का फोटो है भाई, इसी वास्ते आज निकला था। इस साईकल मे कोई गीयर नहीं था, गीयर मैने लगाये हैं। अब इसमे २१ गीयर हैं, पेडल भी बदल दिये हैं, बाकि आपको तो सब दीख ही रहा है। इस साईकल मे गति तो है परन्तु इसके टायर पतले होने के कारण सड़क पर पकड़ भी कम है और बजरी-रोड़ी इत्यादि मे इसे सम्भालने मे पसीने छूट जाते हैं। अच्छी सड़क पर यह पानी की तरह चलती है लेकिन गड्ढ़ों और मट्टी मे यह लड़खड़ाने लगती है। इस पर अधिकतम ४०० कि.मी. की दूरी तय कर चुका हूँ लेकिन इसमे कुछ न कुछ समस्या इसलिये भी बन जाती है कि इसका फ्रेम हल्का है और ऊबड़-खाबड़ सड़कों के झटकों से यह बिगड़ने लगती है। सच कहुँ तो यह मक्खन जैसी चिकनी सड़कों के लिये ही बनी है। हैंडल नीचे की ओर मुड़ा है और अगर हेंडल के निचले भाग में पकड़ बनायें तो ४० कि.मी. प्रति घँटे की गति कुछ वक्त तक बनायी जा सकती है। हैंडल के नीचे सिरे को पकड़ने पर सर भी झुक जाता है और आप हवा को चीरते हुये निकल जाते हैं। पर अगर उल्टी दिशा से कोई वाहन आपकी तरफ आ रहा है तो आपको बारम बार सर उठा कर उसको ताकना होगा और लम्बी दूरी मे यह समस्या बन जाती है। शहर की धमाचौकड़ी मे तो इसे चलाना कष्टदायी है क्योंकि बार बार ब्रेक लेना और हैंडल मोड़ने पर इसमे संतुलन बिगड़ जाता है। राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के राजमार्गों पर इसे दौड़ाने का आनन्द ही कुछ और है।

मेरी एक अन्य रुची भी है, यानि लोगों द्वारा सड़कों किनारे फेंका गया कूड़ा बटोरना और उसे उपयोग मे लाना। इसमे प्लास्टिक की बोतलें, बीयर के कैन और अन्य सामग्री भी है। यह काम मैने इसलिये आरम्भ किया क्योंकि सुंदर जलाशयों के किनारे, वन-जंगल के सड़क किनारे लोग बेछिटक होकर अपनी गाड़ियों मे से कूड़ा फेंक देते हैं और इससे मुझे बड़ी उदासी हो जाती थी। साईकल की कई एक फोटो मे यह कूड़ा दिखाई देता है, लेकिन वह फोटो मै इंटरनेट पर इसलिये नहीं डालता क्योंकि विश्व भर के लोग इनको देखकर हमारे देशवासियों को ही कोसेंगे। अगली फोटो मे आपको प्लास्टिक की एक थैली घाँस मे चिपकी सी दिखेगी, यह पीछे के टायर से जैसे लगी हुई है। इस मनोरम स्थान मे भी प्लास्टिक का कूड़ा देखकर मन तो खराब हुआ और फोटो भी, कूड़ा सफा करने के बाद फोटो खींचते वक्त एक प्लास्टिक थैली उड़ कर आ लगी।

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सुंदर छटाओं मे कूड़े का तड़का। गोलाकार लाल निशान देखें।

आगे का वीडियो भी इसी जलाशय का है, वीडियो मे थोड़ा कम्पन है इसके लिये क्षमा चाहूँगा। वीडियो ऐसे खींचा है की इस जलाशय के किनारे फेंका गया कूड़ा न दिखे।

कानपुर से १० कि.मी. बाहर देहात का सुंदर जलाशय।

आगे के लेखों को भी पढ़ना न भूलिएगा, ऐसे ही लिखता रहूँगा।

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