चार भाईयों की कहानी

पुरातन काल मे एक बाप को चार पुत्र हुए, चारों का नामकरण हुआ, गोरा, चीना, भूरा अैार कालू। बाप ने चारों पुत्रों को आपसी प्रेम से रहने का आदेश दिया अैार इस सँसार से विदा हो चला। चारों भाईयों मे गोरा सबसे अधिक चालाक अैार अधमी था, उसके पश्चात चीना, भूरा एवं इन सबसे सीधा कालू था।

आरम्भ से ही गोरे ने अपना रंग दिखाना शुरु कर दिया। कालू की संपत्ति पर टेढ़ी दृष्टि रखने लगा।देखते ही देखते अपने परिवार समेत उसने कालू पर आक्रमण कर दिया, कालू को हरा कर उसने उसको अपना दास बना लिया। शेष भाई इस विपत्ति को भाँप नहीं पाए। गोरे की भूख इसपर भी नहीं मिटी अैार उसने अपनी दृष्टि चीना अैार भूरे पर डाली। भूरे अैार चीना ने भी अपना साम्राज्य बढ़ाया तो था, परन्तु आंतरिक कलह के चलते यह ढ़लते चले गये। उधर गोरा नए हथियारों के अविष्कार मे तन-मन से लगा हुआ था। धीरे-धीरे उसने भूरे अैार चीना के घर मे अपनी आवा-भगत शुरू कर दी। चीना तो बहुत चंट था, परन्तु भुरे के परिवार मे कुछ लोग गोरे के बहकावे मे आ गये। गोरे ने उनको साधना आरम्भ कर दिया।

भुरे के परिवार के लोग इस गहन चाल से अभिनज्ञ एक दूसरे की धोती उतारने मे ही लगे रहे। गोरा गुपचुप रूप से भुरे के घर मे सेंघमारी बढ़ाने लगा। एक दिन अवसर ताड़ कर गोरे ने भूरे पर हमला कर दिया। भूरे के परिवार मे तो पहिले से ही भेदिये थे, इसके चलते भूरा पूरी तरह पस्त हो गया। गोरे ने अपना भेड़िया स्वरूप दिखाते हुए भुरे की पूर्ण संपत्ति हड़प ली, इसपर भी गोरा नहीं थमा, उसने भुरे की भाषा, उसके पहिनावे, उसकी संपूर्ण संस्कृति को ही नष्ट करना आरम्भ कर दिया। भूरा नींद से जागा तो परन्तु बहुत अधिक हानि हो चुकी थी। चीना यह सब देख सचेत हो गया अैार गोरे की लाख चेष्टा पर भी पूर्ण रूप से गोरे के अधिकार मे नहीं आया।

गोरा ने कालू के समान अपनी पूर्ण शक्ति से भूरे को पीसा । पर जगत स्वामी को भुरे पर दया आ गयी अैार गोरे के परिवार मे आंतरिक कलह इतनी बढ़ चली, की वह दुर्बल पड़ने लगा। अवसर देख भूरे ने गोरे के दासत्व रूपी जूए को उतार कर चकनाचूर कर दिया। गोरे को अपना मन मार कर भूरे का घर त्यागना पड़ा, पर जाते जाते उसने कई एक षणयंत्र किए। पहिले तो उसने भूरे के घर मे फूठ डाल दी, अैार उसने भूरे के घर मे भेदिये डाल दिए, जो उसके जाने के पश्चात भी गोरे की भाषा अैार उसकी संस्कृति को भूरे के घर पर थोपते रहेंगे।

गोरे के एजेंट भूरे के घर मे सेंघमारी करते रहे, भुरे की गुल्लक से पैसा चुरा कर उसकी पीठ पीछे गोरे के घर को मालामाल करने मे लगे रहे। भुरे ने इसपर भी किसी तरह उन्नति का मार्ग पकड़ लिया अैार यह तथ्य गोरे को खटकने लगा। चीना भी भूरे की उन्नति को देख उससे द्वेष रखने लगा । चीना तो भुरे से अधिक चंट था अैार उसने भूरे के परिवार के भ्रष्ट अगुवों को साधा, उनको भाई चारे के जाल मे फंसा कर चारा बना दिया, अैार अवसर पाकर भुरे पर आक्रमण कर दिया, भुरा तो एक घोंचू की तरह इस जाल मे बुरी तरह उलझ गया था। हार निश्चित थी।

गोरा यह सब देख बहुत प्रसन्न हुआ, उसने अनुमान लगाया की भूरा रेंगता हुआ उसके पास आएगा अैार उसके पाले मे फंसेगा, परन्तु ऐसा हुआ नहीं। गोरे ने एक अैार चाल चली, उसने चीना को बढ़ाना आरम्भ किया, परन्तु एक ऐसी गति से जिससे भूरा सचेत न हो जाए। उधर भूरे के घर के भेदिए, भुरे का माल चुरा कर गोरे के ठिकानों मे लगाते रहे। भुरे के घर के अगुवे ही इस चोरी मे अपनी पूर्ण शक्ति से लगे रहे। गोरे की योजना यह थी की चीना को सशक्त बना अैार भूरे को दुर्बल कर, भूरे पर हमला करवाना। इसपर फिर घोंचु बना भूरा भय से गोरे के पास भगेगा अैार गोरा फिर उसे अपना दास बनाएगा।

चीना चँट था अैार यह तड़ गया की गोरा उसे बढ़ा तो रहा है परन्तु जब वह गोरे के लिए चुनैाती बनेगा तो गोरा उसे चाप देगा। चीना दोगुनी शक्ति से गोरे को पस्त करने मे लग गया। भुरा एक गधे की तरह इस तथ्य से अभिनज्ञ रहा अैार उसके भ्रष्ट अगुअेां ने चीना के मित्रता के प्रस्ताव को स्वीकार कर चीना को घर मे प्रवेश दे दिया। एक बारम फिर चिरैया जाल मे स्वयं चल कर आ गयी। फिर क्या था, चीना ने व्यापार के बहाने अपना जाल बिछाना आरम्भ कर दिया, भूरे के घर के भेदियों को भी साध लिया। जाल कसने ही लगा था की एक अनहोनी हो गयी।

गोरा यह सब देख रहा था अैार चीना को पराजित करने के लिए अपनी ही खिचड़ी पका रहा था।गोरे ने चीना को एक घातक कीटाणु पर शोध करने को प्रेरित किया, अैार पैसा भी पहुँचाया। गोरा यह जानता था की चीना इसे अपना वर्चस्व बढ़ाने का अवसर समझ कर इस लाॅलिपाॅप को लपक कर पकड़ेगा अैार कीटाणु की छिपी हुई घातक शक्ति को चीन्ह नहीं पाएगा। ऐसा ही हुआ, चीना के घर मे यह घातक कीटाणु अपने पिंजरे से बाहिर आ गया अैार चीना के घर मे त्राही माम का उद्घोष हो गया। चीना सकपकाया अैार इस चाल को तड़ कर अत्यंत घबरा गया। चीना को यह लगा की उसके दुर्बल पड़ते ही, गोरा उसे कच्चा चबा जाएगा। यकायका उसने यह युक्ति लगायी कि अगर इस कीटाणु को गोरे, भुरे अैार कालू के घर तक पहुँचा दिया जाए तो हो सकता है की चीना बच जाए अैार शेष भाई कीटाणु की मार से चीना से भी पीछे हो जाएँ ? हुआ कुछ यूँ ही, अैार भूरे को कीटाणु की मार से जूझता हुआ पा कर चीना ने उसपर अपनी शक्ति से प्रहार आरम्भ कर दिया।

भूरा तो गधे की तरह डंडा खा कर फिर अपनी नींद से जागा, अैार गोरे के पाले की अेार भगा। गोरे ने सकपकाए भूरे को मूँह माँगे दाम पर हथियार दे दिए, अैार मन ही मन हँसने भी लगा।चीना ने तो पहिेले से ही यह अनुमान लगा रखा था, वह जानता था की गोरे की चाल भी यही है। तो इसपर वह विचलित नहीं हुआ, भूरे के घर मे घुस कर उसने यह भली भाँति तड़ लिया था की भूरे के संसाधनों की स्थिति क्या है ? कीट के चलते गोेरे की शक्ति भी कम हो गई थी।

आगे उपन्यास की अगली कड़ी लिखनी शेष है, धन्यवाद !!

यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है अैार इसका वास्तविक घटनाअेां कोई समबन्ध नहीं है . . . .

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